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कृषि मंत्री ने सदन में किया बड़ा ऐलान, 15 अगस्त के बाद झारखंड को किया जाएगा सूखा घोषित

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रांची : सुखाड़ पर चर्चा का जवाब देते हुए कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि राज्य में जिस तरह का वर्षापात हुआ है वह चिंता का विषय है। सरकार भी इसको लेकर चिंतित है। पिछले कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री के साथ इस विषय पर चर्चा हुई है। सुखाड़ की पहली बार स्थिति नहीं बनी है। पहले भी झारखंड सुखाड़ और अकाल की चपेट में रहा। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक नहीं कई बैठकें की हैं। कृषि विभाग की तरफ से मुख्यमंत्री और आपदा प्रबंधन विभाग को स्थिति से अवगत करा दिया गया है। अबतक 6 लाख 89 हजार हेक्टेयर भूमि पर फसल का आच्छादन हुआ है, जबकि राज्य में कृषि योग्य भूमि 27 लाख हेक्टेयर है। यानी हमलोग अबतक 35 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किये है।

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सूखे की स्थिति का आकलन के बाद फैसला

कृषि मंत्री बादल ने कहा कि 50 फीसदी से भी कम बारिश हुई है। स्थिति अच्छी नहीं है। सरकार जल्द ही मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक करने वाली है। सरकार वैकल्पिक फसल योजना पर भी काम कर रही है। पांच लाख नए राशन कार्ड की व्यवस्था की जा रही है। जरूरत पड़ने पर फिर से दीदी किचन शुरू की जाएगी। सूखे की स्थिति का आकलन करने के बाद सरकार फैसला लेगी। राशन कार्ड धारकों को भोजन के लिए सीधे पैसा देने के प्रावधान पर भी विचार किया जा सकता है। कहा कि वैसे तो सूखे पर फैसला अक्टूबर के महीने में लिया जाता है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में अगस्त के महीने में सूखे की भी घोषणा की जाती है।

झामुमो विधायक लोबिन हेम्ब्रेम ने किया हस्तक्षेप

मंत्री बादल पत्रलेख के जवाब के बीच झामुमो विधायक लोबिन हेम्ब्रेम ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मंत्री का जवाब चुटीला है। कहा कि सदन में सूखे और अकाल पर चर्चा हो रही है और मंत्री घुमा रहे हैं। किसान पलायन कर रहे हैं। गांव के गांव खाली होते जा रहे हैं। कहा कि सत्र खत्म होने के बाद जब हम इलाके में जाएंगे तो जनता को क्या जवाब होगा। हेमंत सोरेन सरकार का क्या फैसला है मंत्री स्पष्ट रूप से घोषणा करें। क्या राज्य सरकार झारखंड को सूखा क्षेत्र घोषित करेगी?

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