Breaking :
||लोहरदगा में हथियार के साथ एक गिरफ्तार, एक भागने में सफल, भारी मात्रा में हथियार व गोलियां बरामद||सीएम हेमंत सोरेन का ऐलान, नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज होगी रद्द, ग्रामीण 30 साल से कर रहे थे आंदोलन||कोलकाता हाईकोर्ट ने कांग्रेस के तीनों विधायकों को दी सशर्त अंतरिम जमानत||लातेहार: फिर एक महिला ने इलाज के बहाने डॉक्टर पर लगाया छेड़खानी का आरोप||बिहार में नीतीश कैबिनेट का विस्तार, 31 मंत्रियों ने ली शपथ, तेज प्रताप फिर बने मंत्री||DGP नीरज सिन्हा ने कहा- पिछले तीन साल में 1,526 नक्सली गिरफ्तार, 51 मारे गये||जम्मू-कश्मीर में जवानों से भरी बस खाई में गिरी, 7 जवान शहीद, 32 घायल, राष्ट्रपति ने व्यक्त की संवेदना||JPSC के पूर्व अध्यक्ष IPS अमिताभ चौधरी का हार्ट अटैक से निधन||लातेहार: पीटीआर के गारू पूर्वी वन क्षेत्र में हाथी की मौत, पोस्टमार्टम के लिए पहुंची मेडिकल टीम||पलामू में बिजली गिरने से तीन किशोर की मौत, बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे छिपे थे

सरेंडर करने से पहले ही माओवादियों ने सब-जोनल कमांडर की कर दी ह्त्या

'

रांची : सरेंडर करने से पहले ही सब-जोनल कमांडर गुलशन सिंह मुंडा उर्फ गड़ी मुंडा उर्फ सुभाष मुंडा की सेंट्रल कमेटी के सदस्य अनल दा ने हत्या कर दी। गुलशन पर 5 लाख रुपये का इनाम था। हत्या के आरोपी शीर्ष नक्सली अनल दा पर एक करोड़ का इनाम है। यह जानकारी पुलिस मुख्यालय और विशेष शाखा के अधिकारियों को भी मिली है। लेकिन शव नहीं मिलने के कारण पुलिस अधिकारियों ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

इसलिए पुलिस ने गुलशन को फरार नक्सलियों की लिस्ट में ही रखा है। इधर नक्सलियों ने गुलशन की हत्या का दावा भी नहीं किया है। पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार उन्हें जानकारी मिली है कि हत्या के बाद गुलशन के शव को भी दफना दिया गया है। लेकिन कहां, इसे लेकर कुछ भी साफ नहीं हो पाया है। गुलशन के पिता का नाम सोमरा मुंडा है और वह बुंडू के बारूहातू का रहने वाला था।

माओवादी गुलशन का भाई सुरेश मुंडा भी जोनल कमांडर के पद पर था। सरकार की ओर से उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। लेकिन वह अपनी बेटी के अनुरोध के बाद 1 मार्च को रांची पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उसके साथ एरिया कमांडर लोद्रो लोहरा उर्फ सुभाष ने भी आत्मसमर्पण किया।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार सुरेश ने सरेंडर करने के बाद अपने भाई को मुख्यधारा में लौटने को कहा था, जिससे प्रभावित होकर गुलशन भी आत्मसमर्पण करने की तैयारी कर रहा था। लेकिन इसी बीच शीर्ष नक्सलियों को उसके आत्मसमर्पण करने की योजना की जानकारी मिली और उसकी ह्त्या कर दी गयी।