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झारखंड में बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत, कांग्रेस विधायक सरकार से अलग होने को ले कर रहे मंत्रणा, मीडिया से बनाई दूरी

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रांची : राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के पक्ष में कांग्रेस विधायकों का वोटिंग राज्य में बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत दे रहा है। 10 विधायकों के पार्टी के नियम से परे जाकर क्रॉस वोटिंग करने से कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व असमंजस में है। इस संबंध में राज्य नेतृत्व से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक कांग्रेस के एक दर्जन से ज्यादा विधायक सरकार को झटका देने के मूड में हैं. संख्याबल के लिहाज से दो तिहाई विधायकों का यह समूह नई पार्टी भी बना सकता है। पूरी रणनीति तैयार की जा रही है। विधायकों का समूह एकजुटता बनाए रखने के लिए राज्य से बाहर भी जा सकता है। इस कवायद में लगे विधायकों ने फिलहाल मीडिया से दूरी बना रखी है। वे खुलकर सामने नहीं आना चाहते। उनका कहना है कि अब झामुमो के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में बने रहने का कोई फायदा नहीं है।

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दूसरी ओर, भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने शुक्रवार को तेज राजनीतिक गतिविधियों के बीच नई दिल्ली रवाना हो गए। वे वहां के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क कर राज्य की राजनीतिक स्थिति से अवगत कराएंगे। हाल ही में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी।

झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 29 जुलाई से शुरू होगा। इस दौरान सरकार को झटका लग सकता है। अगर राष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी को उम्मीद से ज्यादा वोट मिले तो सत्ताधारी पार्टी असहज महसूस करेगी। इस दौरान उलटफेर होने की भी संभावना है। कई मौकों पर निर्दलीय विधायक भाजपा के साथ जाने को तैयार हैं। ऐसे में राजनीतिक उथल-पुथल की स्थिति में भी उनकी भूमिका अहम होगी।