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डोली में पारंपरिक तरीके से विदा हुई मां सरस्वती, युवाओं की हो रही प्रशंसा

शशि शेखर/बरवाडीह

लातेहार : एक ओर जहां प्रतिमा विसर्जन को लेकर पुरानी परंपरा पूरी तरह से विलुप्त होने के कगार पर है। वहीं दूसरी ओर बरवाडीह प्रखंड की पुरानी बस्ती अंतर्गत मां दुरजागिन दरबार सेवा संघ के द्वारा सोमवार को प्रतिमा विसर्जन के दौरान पुरानी परंपरागत तरीके से मां सरस्वती को डोली में विदा किया गया।

माँ दुरजागिन दरबार सेवा संघ ने प्रतिमा की स्थापना करने के बाद पूरे विधि से दो दिनों तक पूजा अर्चना करने के बाद सौमवार को प्रतिमा विसर्जन को लेकर दिन में झाली निकाली गई। जहाँ माँ की प्रतिमा किसी वाहन में नही बल्कि डोली में थी और उसे स्थानीय लोगों के द्वारा काँधा देकर गाजे-बाजे और भक्ति गीतों के बीच पूरे नगर में भ्रमण कराते हुए, मेंन रोड स्थित धड़धड़ी नदी में ले जाया गया।

इस दौरान पूरा इलाका भक्ति में माहौल में रंग चुका था जहां लोग पुरानी बस्ती के युवाओं के इस पहल की जमकर प्रशंसा भी कर रहे थे। वही धड़धड़ी नदी में भी पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना करने के बाद प्रतिमा का विसर्जन किया गया।

दुरजागिन दरबार सेवा संघ के संस्थापक रवि सिंह ने बताया की प्रतिमा विसर्जन को लेकर पुरानी संस्कृति और परंपरा को लोग भूलते जा रहे हैं। उसे बचाए रखने को लेकर एक बार फिर से पुरानी परंपरा के तहत मां की विदाई डोली में करने की शुरुआत की गई है।

साथ ही हम सभी के द्वारा यह अभियान भी चलाया जा रहा है कि प्रतिमा विसर्जन के दौरान कहीं भी कोई अश्लील गीत ना बजाए जाए।

इस दौरान मौके पर दुरजागिन दरबार सेवा संघ के संस्थापक रवि सिंह, संदीप कुमार सिंह, प्रवीण कुमार, विनय चंदेल, गोलू कुमार गुप्ता, पवन कुमार, सतेंदर कुमार, छितिज कुमार, पुटुन सिंह समेत कई युवा मौजूद थे।


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