Breaking :
||बंद औद्योगिक इकाइयों को पुनर्जीवित करेगी राज्य सरकार : मुख्यमंत्री||आर्थिक तंगी के कारण कोई भी छात्र उच्च एवं तकनीकी शिक्षा से न रहे वंचित: मुख्यमंत्री||झारखंड में मानसून की आहट, भारी बारिश का अलर्ट जारी||बड़गाईं जमीन घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, जमीन कारोबारी के ठिकाने से एक करोड़ कैश और गोलियां बरामद||पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सेक्शन अधिकारी समेत दो रिश्वत लेते गिरफ्तार||सतबरवा में कपड़ा व्यवसायी के बेटे और बेटी के अपहरण का प्रयास विफल, लातेहार की ओर से आये थे अपहरणकर्ता||लातेहार: एनडीपीएस एक्ट के दोषी को 15 वर्ष का कठोर कारावास और 1.5 लाख रुपये का जुर्माना||लातेहार सिविल कोर्ट में आपसी सहमति से प्रेमी युगल ने रचायी शादी||लातेहार: किड्जी प्री स्कूल के बच्चों ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर किया योगाभ्यास||किसानों की समृद्धि से राज्य की अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती : मुख्यमंत्री
Saturday, June 22, 2024
Parenting Tips

Parenting Tips: यदि बच्चों को बनाना चाहते हैं संस्कारी, तो माता-पिता अपनायें ये टिप्स

कैसे बच्चों को बनायें संस्कारी

Parenting Tips: हर माता-पिता अपने बच्चे से बहुत प्यार करते हैं। माता-पिता हमेशा चाहते हैं कि उनका बच्चा स्वस्थ और खुश रहे। बच्चे की ख़ुशी के लिए वह उसकी लगभग सभी माँगें पूरी करना चाहते हैं। इसके अलावा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए अच्छी शिक्षा भी दिलाना चाहते हैं। लेकिन अक्सर माता-पिता बच्चे के प्यार में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिसका असर बच्चे के व्यवहार पर पड़ता है। बच्चे के पालन-पोषण के दौरान उसकी हर छोटी-बड़ी मांग को पूरा करने के साथ-साथ उसकी हर जरूरत को पूरा करना, उसकी गलतियों को नजरअंदाज करना, बिना रोक टोक उसका जिद्दी और गुस्सैल रवैया अपनाने से बच्चा बिगड़ने लगता है और उसका भविष्य भी खराब हो जाता है। ऐसे में लगता है कि माता-पिता को बच्चे को बचपन से ही संस्कार और अनुशासन सिखाना चाहिए, ताकि बच्चा एक आदर्श इंसान, एक अच्छा बेटा और एक सफल नागरिक बन सके। आइये जानते हैं कि बच्चे को संस्कारी और अनुशासित बनाने के लिए माता-पिता को क्या करना चाहिए।

बड़ों से अनुमति लेना सिखायें

अगर बच्चे अपनी इच्छानुसार कार्य करना चाहते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन छोटी उम्र में उन्हें सही-गलत का पता नहीं चलता। ऐसे में मर्जी से किया गया काम उनको गलत रास्ते पर भी ले जा सकता है। इसलिए माता पिता को बच्चों में शुरुआत से ही पूछकर कार्य करने की आदत डलवानी चाहिए। खाना खाने से पहले और बाहर खेलने जाने से पहले माता-पिता की अनुमति लेनी चाहिए। बड़ों से पूछने की आदत विकसित करने से बच्चे संस्कारी बनते हैं। हालाँकि, माता-पिता को बच्चों की पसंद और इच्छाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में अगर बच्चा अनुमति मांगता है तो माता-पिता को उनसे सलाह लेनी चाहिए कि वे क्या करना चाहते हैं।

गलतियां करने पर उसे रोकें

अक्सर बच्चे गलती पर रोके न जानें, डांट न खाने और ज्यादा लाड़-प्यार देने के कारण बिगड़ जाते हैं। छोटी उम्र में जब बच्चे छोटी-छोटी जुबान में बड़ों का नाम लेते हैं तो हर किसी को अच्छा लगता है। लेकिन उसी उम्र में बच्चे को रोकें और बतायें कि बड़ों को उनके नाम से नहीं बल्कि उनके रिश्ते के सम्बोधन से बुलायें। बच्चे की गलतियों पर हंसने या उन्हें नजरअंदाज करने की बजाय अगर माता-पिता बच्चे को पहली बार में ही टोक दें तो वह गलती नहीं दोहरायेगा।

सभी का सम्मान करना सिखायें

बच्चों को संस्कार सिखाने के लिए सबसे जरूरी है कि उन्हें बड़ों और छोटों का सम्मान करना सिखाया जाये। अगर बच्चा आदरपूर्वक कुछ न पूछे, रोये, चिल्लाये और पैर पटके तो अपना फैसला न बदलें। बल्कि उन्हें समझायें कि इस तरह के उनकी कोई बात नहीं मानी जायेगी। किसी भी कार्य को सही तरीके से करने के लिए उन्हें सभी को सम्मान देना चाहिए। यह पाठ पढ़ाने से बच्चा अपने गलत व्यवहार को बदल सकता है।

बच्चों से चिल्लाकर या गुस्से में बात न करें

छोटे बच्चे अक्सर अपनी बात मनवाने के लिए चिल्लाते हैं। लाड़-प्यार के कारण वे गुस्सा करना सीख जाते हैं और गुस्से में किसी से भी बात करने लगते हैं। उनके चिल्लाने या गुस्सा करने पर अगर आप उनकी बात मानते हैं तो बच्चा हर बार वैसा ही व्यवहार करता है। इस प्रकार के व्यवहार को बचपन में तो संभाला जा सकता है, लेकिन बड़े होने पर भी काम करवाने के लिए गुस्सा करना और चिल्लाना बच्चे की आदत बन सकती है। इसलिए उन्हें गुस्से पर काबू रखना सिखायें। आपको भी उनके किसी गलत काम पर चिल्लाना या क्रोधित नहीं होना चाहिए।

साझा करना सिखायें

बच्चे को अपने माता-पिता का प्यार किसी और के साथ बांटना पसंद नहीं है। कम उम्र में जब बच्चे को छोटे या बड़े भाई-बहनों या अन्य बच्चों के साथ रखा जाता है, तो वे अपने माता-पिता को दूसरे बच्चे को लाड़-प्यार करते देखकर चिढ़ जाते हैं। इसके अलावा घर में एक ही उम्र के दो या दो से अधिक बच्चों की लड़ाई का एक कारण यह भी होता है कि वे एक-दूसरे से अपनी बातें शेयर नहीं करना चाहते। ऐसे में बच्चे को शेयरिंग सिखायें। अपनी चीजें दूसरों के साथ शेयर करना, कुछ भी खाने-पीने से पहले दूसरों से पूछना और स्वार्थ न दिखाना, ये सब बच्चों में अच्छे संस्कार पैदा करते हैं।

कैसे बच्चों को बनायें संस्कारी